रक्षाबंधन से पहले ‘मोदी भाईजान’ का मुस्लिम बहनों को तोहफा, संसद में पास हुआ तीन तलाक बिल

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केंद्र की मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि आज 30 जुलाई को संसद के राज्यसभा में तब हासिल हुई जब राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास हो गया. राज्यसभा में वोटिंग के दौरान बिल के समर्थन में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े. इससे पहले तीन तलाक बिल लोकसभा में पास हो चुका था. इसी के साथ तीन तलाक देकर पत्नी को घर से बेदखल करने वालों को जेल भेजने का रास्ता साफ हो गया. अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा.

इसी सत्र में 26 जुलाई को लोकसभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद बड़ा सवाल ये था कि मोदी सरकार राज्यसभा में कैसे बहुमत जुटा सकेगी? तीन तलाक बिल के लिए मोदी सरकार पहले कार्यकाल से ही जुटी हुई थी और चुनाव प्रचार के वक्त भी पीएम मोदी ने मुस्लिम बहनों से इसका वादा दोहराया था. यही वजह थी कि जब पिछली लोकसभा में पारित होने के बाद यह बिल राज्यसभा में अटक गया तो मोदी सरकार अध्यादेश लेकर आई. इस बार इस लोकसभा में कुछ बदलावों के साथ ये बिल फिर से पेश हुआ जो कि अब लोकसभा के साथ राज्यसभा में भी पास कराने में सरकार कामयाब रही.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर तीन तलाक बिल का समर्थन करने वाले सभी दलों और दोनों सदनों के सांसदों का शुक्रिया किया. पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘पूरे देश के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है. आज करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई है और उन्हें सम्मान से जीने का हक मिला है. सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है. इस ऐतिहासिक मौके पर मैं सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं.



सदन में बहस के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दुनिया के 20 देशों में तीन तलाक बैन है. ऐसे में तीन तलाक को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आज़ाद पर निशाना साधते हुए कहा कि – गुलाम नबी साहब, आपने 1986 में 400 सीटें जीती थीं. उसके बाद देश में नौ चुनाव हुए, आपको कभी भी बहुमत नहीं मिली. सोचिए ऐसा क्यों नहीं हुआ? आप 2014 में 44 पर थे, आज 52 पर हैं.

मुल्क की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के आत्मसम्मान, सुरक्षा, इंसाफ और मुस्तकबिल के लिए मोदी सरकार का ये फैसला सदन के पटल से कानून के गलियारों तक पहुंचा. इसी के साथ बात-बात पर तीन तलाक बोलकर उन महिलाओं के साथ ज्यादती नहीं की जा सकेगी जो किसी की बेटी तो किसी की बहन हैं. सहारनपुर की आतिया साबरी पहली महिला थीं जिन्होंने तीन तलाक की जंग सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी और माननीय सर्वोच्च अदालत से हक में फैसला लेकर लौटीं. ऐसी ही सैकड़ों-हज़ारों महिलाएं अपने हक के लिए अपनी आवाज़ अब बुलंद कर सकेंगीं.  

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