Taiwan में दो महाशक्तियां आमने-सामने, China का जवाब देने आ पहुंचा America का युद्धक महापोत

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चीन की आक्रामकता जहां ताइवान में युद्ध का तनाव पैदा कर रही है वहीं दुनिया में चिंता की वजह बन रही है. चीन एक तरफ भारत से युद्ध करने की स्थिति में उलझा हुआ है दूसरी तरफ ताइवान से भिड़ा हुआ है. कोरोना महामारी ने पहले ही चीन को दुनिया का खलनायक नंबर वन बना दिया है ऐसे में चीन की कोई भी गैरजिम्मेदाराना हरकत तृतीय युद्ध की लपटों में दुनिया को झोंक सकती है.

ताइवान में स्थिति है विकट

ताइवान में चीन के साथ युद्ध का तनाव अपने सबसे ऊंचे स्तर पर आ पहुंचा है. अमेरिका का ताइवान के करीब आना चीन को नागवार गुजर रहा है इस कारण उसका ताइवान के चल रहा गतिरोध फिर से बढ़ता हुआ दिखने लगा है. रविवार 24 जनवरी को लगातार दूसरे दिन भी चीन ने ताइवान के आकाश में अपने 15 लड़ाकू विमानों को जबरन घुसाया जिसके बाद ताइवान का रक्षा मंत्रालय हरकत में आया और चीन को अपने जहाज वापस लेने पड़े.

ताइवान हुआ युद्ध के लिए तैयार

चीन की बद्तमीज आक्रामकता को देख कर ताइवान ने भी युद्ध की तैयारी कर ली है. चीनी विमानों को भगाने के लिए जब ताइवानी एयरफोर्स ने अपनी मिसाइलों का रुख चीन के विमानों की तरफ कर दिया. और ताइवानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने अविलम्ब उड़ान भरी तो चीन को ताइवान की जवाबी कार्यवाही का संकेत मिल गया. जब ताइवान की वायुसेना जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी तो चीन के जहाज़ों को ताइवान के आकाश से भागना पड़ा.

शनिवार को भी यही हुआ था

शनिवार अर्थात 23 जनवरी को भी चीन ने ताइवान के साथ ऐसी ही हवाई बदतमीजी की थी और उसके वायुक्षेत्र में अपने 8 H-6K परमाणु बॉम्बर्स की उड़ान का मुजाहिरा किया था. उस समय इन बॉम्बर्स के साथ चार J-16 लड़ाकू विमानों का दस्ता भी साथ चल रहा था. इस बार भी ताइवान की जवाबी कार्रवाई ने चीन के विमानों को खदेड़ दिया था. चीन की इन हरकतों से ऐसा प्रतीत होता है कि वह ताइवान को डराना चाहता है और अमेरिका के करीब जाने से रोकना चाहता है. हाल ही में हुई अमेरिकी राजनयिक की ताइवान यात्रा से चीन का गुस्सा भड़का हुआ है.

अमेरिकी युद्धपोत आ पहुंचा 90 विमानों के साथ

अभी अमेरिका में नए राष्ट्रपति की शपथ ग्रहण कार्यक्रम के चार ही दिन बीते हैं कि अमेरिका ने चीन के विरुद्ध ताईवान के नजदीक फिर से अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को तैनात कर दिया है. अमेरिका अपने मित्र ताइवान पर चीनी आक्रामकता को लेकर चिंतित है जिस कारण उसे यूएसएस थिओडोर रूजवेल्ट के नेतृत्व में अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के काफिले को साउथ चाइना सी में भेजना पड़ गया है. शनिवार को चीन के इलाके के करीब पहुंचने वाले इस स्ट्राइक ग्रुप में जहां 90 लड़ाकू विमान शामिल हैं वहीं 3000 नौसैनिकों के साथ बहुत से डिस्ट्रायर, फ्रिगेट्स और परमाणु पनडुब्बियां भी मौजूद हैं.
 

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