UNHRC Vs Israel: वाह, इज़राइल का आत्मस्वाभिमान प्रशंसनीय है

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् (UNHRC) को औकात दिखाई इजराइल ने -मगर हमारा सुप्रीम कोर्ट चुप रहा.
31 अक्टूबर, 2021 को इजराइल के UN में प्रतिनिधि Gilad Erdan ने UNGA में परिषद् की धज्जियाँ उड़ाते हुए उसकी रिपोर्ट को फाड़ कर परिषद् को उसकी औकात दिखा दी.
हर बार की तरह UNHRC ने अपनी आदत के अनुसार वार्षिक रिपोर्ट में इजराइल की निंदा की थी जिसे इजराइल ने सहन नहीं किया.
Gilad Erdan ने बताया कि अब तक इस संस्था ने 15 वर्ष में (2006 में स्थापना के बाद) सदस्य देशों के खिलाफ 142 निंदा प्रस्ताव पारित किये हैं और उनमे 95 अकेले इजराइल के खिलाफ हैं —
उन्होंने बड़े सख्त लहजे में ये भी कहा कि यहूदीवाद को हमेशा Racism कह कर हमें निशाना बनाया गया जबकि हमारे देश में लोकतंत्र है और सभी धर्मो को मानने की लोगों को आज़ादी है.
1975 में जब Zionism को UN ने Racism बता कर प्रस्ताव पास किया था तो हमारे एम्बेसडर Chaim Herzog ने UNGA में भाषण देते हुए उस प्रस्ताव को फाड़ दिया था .
आज की UNHRC की रिपोर्ट भी कूड़ेदान में फेंकने लायक है और ये कह कर Erdan ने रिपोर्ट के फाड़ कर 4 टुकड़े कर दिए.

इजराइल के प्रतिनिधि ने जो भी किया, बहुत सही किया क्यूंकि ये संगठन कुछ स्वार्थी देशों की कठपुतली बन कर काम कर रहा है.

UNHRC के स्थाई एजेंडे में केवल 2 देश रहते हैं, इजराइल और इंडिया –हमारे देश में इसे हवा देने वाले सारे वामपंथी एवं कांग्रेस मौजूद हैं.
कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन UNHRC का सबसे प्रिय विषय रहता है –इनको हवा देने वाले वामपंथियों ने इस संगठन के जरिये 4 मार्च, 2020 को सुप्रीम कोर्ट में CAA खिलाफ याचिका भी दायर की थी.
किसी विदेशी संगठन को भारत के कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने का अधिकार कैसे हो सकता है.
वो रिहाना, ग्रेटा, मिया खलीफा या कमला हैरिस की बहन को कृषि कानूनों के खिलाफ बोलने के लिए पैसा और समर्थन दे सकतेहैं मगर कोर्ट में नहीं जा सकते.
मैंने बहुत तलाश किया मगर नहीं मिला कि UNHRC की याचिका पर हमारे सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया.
कायदे में तो उन्हें इस याचिका को कूड़े में डाल देना चाहिए था मगर विषय मोदी के विरुद्ध है तो फैसला तो सोच समझ कर ही करेंगे ना.