US Vs Venezuela Oil War: Maduro Out, Trump In – अब किसका होगा Control दुनिया के Biggest Oil Reserves पर?

US-वेनेजुएला तनाव दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार पर केंद्रित हो गया है, जहां ट्रंप प्रशासन ने मादुरो पर दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मादुरो के पतन से अमेरिका को तेल उत्पादन में बड़ा फायदा होगा, जबकि रूस को झटका लगेगा। यह खबर ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिला रही है।
वेनेजुएला के तेल भंडार पर US का दांव
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार हैं, जो लगभग 300 बिलियन बैरल से अधिक हैं। अमेरिका लंबे समय से इन पर नजर रखे हुए है, खासकर राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को “फिक्स” करने और अमेरिकी कंपनियों को वहां निवेश का मौका देने की बात कही है। मादुरो सरकार पर नए प्रतिबंधों के साथ US ने सैन्य दबाव भी बढ़ाया है, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया।
यह स्थिति US-Venezuela तनाव को नई ऊंचाई दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मादुरो हटते हैं, तो अमेरिका चेवरॉन जैसी कंपनियों के जरिए तेल उत्पादन को दोगुना कर सकता है। वर्तमान में वेनेजुएला का उत्पादन 7-8 लाख बैरल प्रतिदिन है, जो 1990 के दशक में 35 लाख बैरल था। ट्रंप का दावा है कि US कंपनियां अरबों डॉलर निवेश कर इसे बहाल करेंगी।
मादुरो गिरफ्तारी से US को फायदा, रूस को नुकसान
मादुरो की हालिया गिरफ्तारी ने वैश्विक समीकरण बदल दिए हैं। US ने न्यूयॉर्क में मादुरो को पकड़ लिया, जिसके बाद ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका अस्थायी रूप से वेनेजुएला को “चलाएगा”। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे US को तेल सप्लाई में सस्ता और सुरक्षित स्रोत मिलेगा, जो रूस के लिए बड़ा झटका है। रूस वेनेजुएला को हथियार और आर्थिक मदद देता रहा है, लेकिन अब उसकी ऊर्जा राजनीति कमजोर पड़ रही।
पुतिन को झटका इसलिए लगेगा क्योंकि वेनेजुएला रूस का लैटिन अमेरिका में प्रमुख सहयोगी था। चीन भी प्रभावित होगा, जो तेल के बदले लोन देता रहा। ट्रंप की रणनीति से OPEC+ गठबंधन में दरार आ सकती है। ऑयल मार्केट में कीमतें अस्थिर हैं, लेकिन लंबे समय में US के लिए यह फायदेमंद साबित होगा।
ग्लोबल ऑयल मार्केट पर असर
US-Venezuela तकराव से क्रूड ऑयल प्राइस में उथल-पुथल मच गई है। हालिया स्ट्राइक्स के बाद मार्केट सप्लाई सqueeze का डर है, हालांकि ग्लोबल उत्पादन बढ़ रहा है। भारत जैसे आयातक देशों के लिए तेल महंगा हो सकता है, लेकिन अगर US वेनेजुएला से निर्यात बढ़ाता है, तो कीमतें स्थिर होंगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 में वेनेजुएला का उत्पादन 20 लाख बैरल तक पहुंच सकता है।
लैटिन अमेरिका में अलार्म बजा है। ब्राजील, कोलंबिया जैसे देश US की कार्रवाई से सतर्क हैं। दुनिया की नजरें अब UN और OAS पर हैं, जहां प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
रूस-चीन की प्रतिक्रिया और भविष्य की संभावनाएं
रूस और चीन ने US की “रेड लाइन्स क्रॉस” करने की आलोचना की है। मॉस्को ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी, जबकि बीजिंग ने तेल टैंकरों पर प्रतिबंधों का विरोध किया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही देशों की तुलना में US की पोजीशन मजबूत है। मादुरो के पतन से नया विपक्षी सरकार तेल उद्योग को प्राइवेटाइज कर सकती है।
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