Uttarpradesh 2022: चुनावी जंग का प्रदेश उत्तरप्रदेश – कौन बनाएगा सरकार?

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कौन बनाएगा सरकार ? ये है वह यक्षप्रश्न जो अपना उत्तर तलाश रहा है. चुनावी पंडितों और राजनीतिक गलियारों में बड़े बड़े लोगों से लेकर छोटे छोटे महारथियों तक को ये सवाल चुनौती दे रहा है. सब अपनी अपनी तरह का जवाब दे रहे हैं लेकिन उनको भी पता है कि क्या वास्तव में होने वाला है वो उनको नहीं पता है.
न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के मंच से हम यह कहना चाहेंगे कि सवाल तो कठिन है पर इसका जवाब कठिन नहीं है. कहने को कहना तो बहुत आसान है और वही हमारा जवाब भी है पर वह जवाब हम इस लेख के अन्त में बताना चाहेंगे फिलहाल देखते हैं कि क्या है सूरते हाल चुनावी जंग के प्रदेश उत्तरप्रदेश का.
एक के बाद एक बात करते हैं चुनावी महारथियों की जो अपनी फौज लिये जंग को तैयार हैं. मजे की बात है कि लोकतंत्र में जंग जनता लड़ती है महारथी नहीं लेकिन हारती जनता है और जीतते महारथी हैं. इसलिये ये महारथी अपनी फौज लेकर जनता को जीतने के मन्सूबे लेकर सामने आये हैं और सभी को उम्मीद है कि उनकी फौज का असर अच्छा पड़ेगा और फ़ौज देख कर ही जनता जीत उनके नाम कर देगी. पर कोई नहीं जानता कि जनता के जहन में क्या चलता है क्योंकि अक्सर चुनावी जंग का जो फैसला आखिर में सामने आता है, लोगों को हैरान कर देता है.
बात करते हैं महारथियों की. एक के बाद एक. चुनावी जंग को विश्लेषणकर्ता तीन तराजुओं पर तौलते हैं और उसके हिसाब से अनुमान लगाते हैं कि किसका पलड़ा भारी है. पहली तराजू है पार्टी की. जिसकी पार्टी में है दम वही है दमदार. दुसरी तराजू है कैन्डीडेट की. अगर कैन्डीडेट में है दम तो पार्टी कोई भी हो, फर्क नहीं पड़ता -उसे तो जीतना ही होता है. और तीसरी तराजू है मुद्दों की. ये वो तराजू है जो कभी-कभी पार्टी और उसके कैन्डीडेट -दोनो पर भारी पड़ जाता है. मुद्दों की मार नानी याद दिला देती है पार्टियों को और जमीन पर ला पटकती है प्रत्याशियों को.

दल कितने दमदार हैं प्रदेश में

आइये पहली तराजू से तौलते हैं यूपी 2022 के वजन को. पार्टी की बात होगी तो बेशक भाजपा भारी है सभी पर. भाजपा की केन्द्र सरकार के सिरमौर मोदी जैसा नेता देश में कोई नहीं. मोदी के कामों की मिसाल देश में अतुलनीय है. पार्टी वो ऐतिहासिक पार्टी है जिसने तीन सीटों से तीन सौ तीन सीटों का सफर तय किया है. कुछ नहीं बहुत कुछ है पार्टी में और दम भी सबसे ज्यादा. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अपने घर में भाजपा के सामने बौनी नजर आती हैं. दोनो ही पार्टियों के पास एक एक ही नेता हैं जो पार्टी के मुखिया हैं बाकी सभी मोहरे हैं. दोनो ही पार्टियां अपने पिछड़े और दलित वोटों पर निर्भर हो कर चुनाव जीतने के मन्सूबे पाल रही हैं पर दोनो से बड़ा वोट बैंक भाजपा का है जो दलित-पिछड़े को तो साथ लिये ही है -देश में उभरते हिन्दुत्व का इकलौता चेहरा है. कांग्रेस की बात करना समझदारी नहीं होगी क्योंकि उत्तर प्रदेश इस बार कांग्रेस-मुक्त प्रदेश बन सकता है.

प्रत्याशी कितने प्रभावशाली हैं 

दूसरी तराजू है नेताओं की. तो इस तराजू पर भी भाजपा ही भारी है. मोदी पहले ही बहुत वजनदार हैं और उस पर प्रदेश में उनके जैसे व्यक्तित्व के भगवा रूप अर्थात योगी आदित्यनाथ की धमाकेदार उपस्थिति है. योगी न केवल भाजपा के ब्रान्ड हैं बल्कि हिन्दुत्व के भी फायरब्रान्ड चेहरे हैं. अगर कद की बात करें तो जो कद देश में मोदी का है वही कद प्रदेश में योगी का है. योगी बोलते कम और काम अधिक करते हैं. योगी की पहचान एक मजबूत नेता की है जो मोदी की तरह बड़े फैसले लेने में नहीं हिचकता है. और यही खासियत उनकी लोकप्रियता के ग्राफ को ऊंचाई प्रदान करती है. योगी के सामने हैं तीन नेता जो एक दूसरे के वोट काटने के लिए राजनीति करते नजर आ रहे हैं. अखिलेश यादव, मायावती और ओवैसी तीनों दलित-पिछड़ों और मुस्लिम वर्ग के वोटों में अपना आधार तलाशते हैं. ऐसे में वे योगी से अधिक एक दूजे के लिए हानिकारक हैं. ये आपसी कटाई-छंटाई भाजपा के वृक्ष को और सुपुष्ट करती है और इससे उसे अधिक घना और फलदायी रूप प्राप्त होता जाता है.

मुद्दों का क्या है सूरते हाल

अब बात कीजिये तीसरे तराजू की. ये तराजू है मुद्दों की. अमूमन जो मुद्दे देश में हैं वही मुद्दे प्रदेश में भी हैं. बिजली पानी स्वास्थ्य शिक्षा रोजगार. लेकिन लोगों को ये जानकार हैरत होगी कि इन पाँचों मुख्य मुद्दों पर योगी सरकार ने लगातार काम किया है और अगर आंकड़े देखे जाएँ तो स्कूलों से लेकर अस्पतालों तक और घरों में पानी पहुँचाने से लेकर घरों में बिजली के कनेक्शन लगवाने तक में योगी सरकार ने बहुत प्रगति की है और स्पष्ट तौर पर दर्शित हो रहा है कि इस गति से ही यदि उसे काम करने दिया गया तो अगले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश वास्तव में उत्तम प्रदेश बन कर उभरेगा. योगी के सामने बसपा और सपा उन्ही मुद्दों को लेकर उछलकूद की राजनीति कर रही हैं जो देश में कांग्रेस कर रही है. कांग्रेस का काम ही विरोध करना है चाहे सरकार कितना भी अच्छा काम करे. बस यही नकल प्रदेश में अखिलेश और मायावती करने में जुटे हुए हैं.
राष्ट्रीय स्तर पर जो-जो राहुल गांधी बोलते हैं, वही राग प्रदेश स्तर पर सपा और बसपा अलापती हैं. चाहे किसान आंदोलन की बात हो अथवा सीएए अथवा कश्मीर और मंदिर को लेकर सरकार का विरोध करना हो -तीनो पार्टियां एक ही जुबान बोलती हैं. पर जनता सिर्फ सुनती नहीं है, कार्रवाई भी करती है और जब वो समझ जाती है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ तो वो फैसला करने से चूकती भी नहीं है. देश के साथ चलने वाले लोगों को और देश के विरोध में खड़े लोगों को जनता अब पहचानने लगी है और यही पहचान अब इस बार उत्तर प्रदेश में चुनाव के परिणाम को प्रभावित करेगी.

बहरहाल, बीजेपी को उम्मीद है कि योगी दोबारा यूपी में सरकार बनाने में कामयाब होंगे और सपा,बसपा, कांग्रेस के सामने अस्तित्व बचाने का संकट होगा तो वहीं विपक्ष अबकी बार दोगुने जोश से चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है. विपक्ष को लग रहा है कि बीजेपी के खिलाफ उसके तरकश में अब कई तीर आ चुके हैं. ऐसे में बस कुछ महीने और इंत़ा कीजिए, मार्च 2022 के बाद सब कुछ साफ़ हो जाएगा.

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