चिदंबरम ये भी बताएं क्या सहाराश्री सुब्रत रॉय के खिलाफ सेबी (SEBI) और ईडी (ED) की कार्रवाई दुर्भावनाग्रस्त नहीं थी?

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‘जब दिया रंज बुतों ने तो खुदा याद आया’

कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार देख कांग्रेस अब बीजेपी को संविधान की याद दिला रही है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कह रहे हैं कि केंद्र सरकार सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल कर रही है. लेकिन यही सवाल कांग्रेस की पूर्व की सरकारों से भी पूछा जाना चाहिए. ये सब जानते हैं कि राजनीतिक दुर्भावना से ग्रस्त कांग्रेस सरकार के निशाने पर कितने राजनीतिज्ञ और कॉरपोरेट हाउस रहे हैं और उनके खिलाफ सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल किस तरह से हुआ है. सहारा ग्रुप तो इसकी जीवंत मिसाल है जो पिछले 10 साल से कांग्रेस के दिए ज़ख्मों पर मरहम नहीं लगा सका है.

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सहारा को बर्बाद करने पर क्यों आमादा थी कांग्रेस?

दस साल पहले अमित शाह के खिलाफ चिदंबरम ने जिस तरह से सीबीआई का इस्तेमाल किया था उसी तरह उनकी नज़र सहारा ग्रुप के सहाराश्री सुब्रत रॉय सहारा पर भी टेढ़ी हुई थी. जिसके बाद देखते ही देखते सहारा ने खुद को कई कानूनी मामलों में घिरा पाया और अदालती चौखट पर उसे तरह-तरह के आरोपों पर सफाई देनी पड़ी. यूपीए सरकार की कार्रवाई का सीधा असर उन हज़ारों कर्मचारियों की रोज़ी रोटी पर पड़ा जो सहारा में दो-तीन दशक से काम कर रहे थे.

सुब्रत रॉय को सोनिया के खिलाफ राष्ट्रवादी अभियान की कीमत पड़ी चुकानी?

क्या सहारा से कांग्रेस की नाराज़गी की वजह विदेशी मूल के मुद्दे पर पीएम के खिलाफ सहराश्री का राष्ट्रवादी अभियान नहीं था? तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को खुश करने के लिए क्या चिदंबरम ने सेबी को राजनीतिक हथियार नहीं बनाया था?
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कांग्रेस आखिर सहारा समूह के साथ वो कौन सा हिसाब बराबर करना चाहती थी जिसने सहारा की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ कर रख दी. खुद सहराश्री सुब्रत राय ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लिए बिना कहा था कि उनके विदेशी मूल का मुद्दा उठाने और उन्हें पीएम बनाने का विरोध करने की कीमत सहारा को चुकानी पड़ी है.

दरअसल, साल 2003 में जब यूपीए को सरकार बनाने का मौका मिला था तब सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर उनके पीएम बनने की सुब्रत रॉय ने मुखालफत की थी. इसी की राजनीतिक कीमत सहाराश्री को आने वाले वक्त में चुकानी पड़ी. तब वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ईडी और सेबी के जरिए सहारा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था.

ऐसे में आज मोदी सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना का आरोप लगाने वाली कांग्रेस अपने और पी. चिदंबरम के गिरेबान में झांक कर ये बताए कि सेबी और ईडी का इस्तेमाल किसने और क्यों किया था?

बहरहाल, अब सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत पर राहत न मिलने पर चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है. सीबीआई की एक टीम उनके घर पर शिफ्टें बदल-बदल कर पहरा दे रही है तो बाकी जांच एजेंसी उनको ढूंढने में जुटी हुई हैं. बड़ा सवाल ये है कि दिल्ली हाईकोर्ट में पी चिंदबरम को जिम्मेदार और कानून का पालन करने वाला नागरिक बताने वाले वकीलों की फौज को भी उनके ठिकानों की खबर नहीं है. एक तरफ चिदंबरम लापता हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस सीबीआई और ईडी की कार्रवाई से तिलमिलाई बीजेपी पर हमला बोल रही है

दिलचस्प बात ये है कि अदालती आदेशों, नोटिस और फरमानों को तामील करने के लिए सहाराश्री सुब्रत रॉय हमेशा देश में मौजूद रहे और उन्होंने ED के डर से भारत छोड़ने या भागने की जरूरत नहीं समझी.

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