कोई सुने दिल्ली में भूतपूर्व सैनिक की विधवा की अंतिम गुहार, 5 साल से नहीं मिली पेन्शन, बदहाली में मरने को मजबूर

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Widow of 1971 war soldier has no money for treatment dying in poverty as could not get family pension for last 5 years and unfortunately no body is there to hear her cries..

जहां देश एक तरफ आज़ादी के 73 साल का जश्न मना रहा है तो वहीं दिल्ली के द्वारका में पूर्व सैनिक का एक घर अपनी बेबसी और मुफलिसी के अंधेरे में जीने को मजबूर है. 1971 की जंग लड़ने वाले सैनिक दीवानी राम की विधवा पार्वती देवी गुरबत और बीमारी के दौर से गुज़र रही हैं. सरकारी लापरवाही के चलते वो आर्थिक हालातों के आगे बुरी तरह टूट चुकी हैं. आज वो गंभीर हालत में बीमार हैं और उनके पास इलाज के पैसे तक नहीं है.

इस सैन्य-विधवा की इस आयु में इस दुर्दशा की बड़ी और एकमात्र वजह ये है कि पति की मृत्यु को पांच साल बीत चुके हैं लेकिन सरकारी रवैये और उदासीनता के चलते आजतक उन्हें पति की पेंशन नहीं मिल सकी है. सैनिक की विधवा पार्वती देवी ने बैंक से लेकर पेंशन से जुड़े हर दफ्तर पर एड़ियां रगड़ीं लेकिन उनकी पेंशन का पीपीओ लेटर निकालने का छोटा सा काम भी सरकारी विभाग ईमानदारी से नहीं कर सका. कभी इलाहाबाद कभी बंगलुरू तो कभी द्वारका के स्टेट बैंक में जहां उनका पेंशन खाता है वो गुहार लगाते लगाते थक गईं. पिछले पांच साल से उनके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाता क्रमांक – 33942894322 (IFSC: SBIN0016120, ब्रांच- ककरोला मोड़, द्वारका, दिल्ली) में पेंशन का एक रुपया तक जमा नहीं हुआ है.

स्वर्गीय दीवानी राम सेना से रिटायर होने के पहले पूंछ, द्रास और बटालिक सेक्टर में अपने सेवाएं दे चुके थे. रिटायर होने के बाद वो एयरफोर्स में एमटीडी (मोटर ट्रांसपोर्ट डिविज़न) में थे. उनका PPO नंबर है – S/10412/1975 और AF DS/1192/1991. पीड़िता विधवा पार्वती देवी के पति का निधन 1 अप्रैल 2014 को हुआ था. इसके बाद पीड़िता ने इलाहाबाद से लेकर बंगलुरु तक सैनिक पेंशन ऑफिस में अपने पति के डेथ सर्टिफिकेट से लेकर तमाम फॉर्म भरकर  फ्रेश पीपीओ के लिए कई बार आवेदन भेजे लेकिन उनके नाम पर नया पीपीओ जारी करने की किसी ने जरूरत नहीं समझी.

यहां तक कि पीड़िता पार्वती देवी Centralized Public Grievance Redress And Monitoring System (CPGRAMS) में भी 29/04/2017 को अपनी शिकायत दर्ज कराई. वहां से उन्हें 1 महीने में शिकायत के निपटान के आश्वासन के साथ केस का स्टेटस जानने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर – DOPPW/E/2017/06740 मिला. 29 मई को CPGRAMS ने यह कह कर केस क्लोज़ कर दिया कि रिकॉर्ड ऑफिस में कॉन्टैक्ट करो. लेकिन ये नहीं बताया कि कौन से रिकॉर्ड ऑफिस में बूढ़ी पेंशनर अपने कांपते पैरों से चक्कर काटे. इस तरह 29 मई को ग्रीवांस सेल ने भी अपनी तरफ से खानापूर्ति करते हुए शिकायत का निपटारा बता दिया था.

नतीजतन एक-एक पैसे को पीड़िता आज मोहताज है. वो गंभीर रूप से बीमार हैं और उनका इलाज घर पर ही चल रहा है. उनकी दो बेटियां और एक बेटा है. बेटा बेरोजगार है. घर में दूसरा कोई आर्थिक स्रोत नहीं है. पैसे की कमी के चलते मकान तक बिक गया. कुछ बचे हुए पैसों से एक दो कमरे का घर बिल्डर से खरीदा तो बिल्डर ने भी पिछले 3 साल से मकान के न तो पेपर दिए और न ही रजिस्ट्री कराई. पीड़ित विधवा की हालत देखकर बिल्डर भी फ्लैट पर कब्जा करने की कोशिश में है और कई बार फ्लैट खाली कराने की धमकी दे चुका है.

आज पीड़िता पार्वती देवी को इंसाफ की जरुरत है. उनके पति 1965 और 1971 की जंग लड़ चुके हैं. उनकी बहादुरी के मेडल हाथ में लिए पार्वती देवी उन्हें बेचना चाहती हैं ताकि घर का खर्चा, खुद का इलाज और पोते-पोती की स्कूल फीस निकल जाए. कई दफे फीस न भर पाने की वजह से पीड़ित के पोता-पोती का नाम स्कूल से कटने तक की नौबत आई. आज पूरा परिवार लाखों रुपये के कर्ज में डूबा है.

पीड़िता अब बोलने की हालात में नहीं हैं. उनके बेटे भुवन भट्ट ने बताया कि किसी भी तरह उनकी पेंशन का काम हो जाए. वो हर जगह कोशिश कर चुके हैं लेकिन लोग सारे डॉक्यूमेंट्स होने के बावजूद काम करते नहीं हैं. किसी को ये फर्क नहीं पड़ता कि पिछले पांच साल से एक विधवा का घर कैसे चल रहा होगा और वो कैसे अपना इलाज कराती होंगी.

आज परिवार को आर्थिक मदद की सख्त जरूरत है. ऐसे में जरूरी है कि सरकार इस पीड़िता परिवार के साथ इंसाफ करे और न सिर्फ पेंशन पूरे एरियर के साथ मिले बल्कि पांच साल जिस मानसिक प्रताड़ना से ये पीड़ित विधवा गुज़री हैं उसका पूरा मुआवज़ा भी दिया जाए. ये सरकार से अनुरोध है. जो भी लोग इस पीड़िता की पेंशन के मामले में मदद कर सकते हैं वो अपना योगदान जरूर दें. आप अगर इस पीड़ित परिवार से किसी तरह की कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं या फिर मदद करना चाहते हैं तो फोन नंबर 7840816184 पर संपर्क किया जा सकता है. हो सकता है कि आपके एक प्रयास से किसी की ज़िंदगी बदल जाए.

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