यह मानव जीवन पाया है तो कुछ अपना भी कल्याण करो !

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जीवन में कितना कुछ करते हैं हम अपने कार मोटरसाइकिल आदि को चमकदार और नया रखने के लिए उसकी सर्विसिंग समय-समय पर करवाते हैं और रोज धुलाई आदि की व्यवस्था करते हैं जबकि अपने शरीर और आत्मा की ना ओवरआयललिंग कराते हैं और ना ही शरीर की समुचित सफाई पर ध्यान केंद्रित करते हैं। कल पुर्जों की सुरक्षा के लिए इसमें कचरा ना फंस जाए पूरा ध्यान रखा जाता है।
देखा जाये तो मशीनों की आयु 10 यया 20 या 30 वर्षों से अधिक नहीं होती है, जबकि हमारे शरीर की आयु 80 या 90,वर्ष से भी अधिक है। सुंदर शरीर के रूप में ईश्वर ने हमें बहुत कीमती भेंट दी है जिसकी रक्षा करना हमारा प्रथम कर्तव्य है किंतु हम ऐसा नहीं करते और अंत समय में रोते हैं,पश्चाताप करते व विलाप करते हैं। कितना कीमती धन था जो हमने खो दिया।
अपने शरीर मैं हम जाने क्या-क्या भरते रहते हैं भोजन के रूप में विभिन्न प्रकारों के रूप में उचित भोजन नहीं लेते जिससे अनिद्रा , वात-पित्त के रोग, एसिडिटी आदि की समस्या से प्रतिदिन दो चार होना पड़ता है। समस्या यह है की जानते बुजते भी हम ऐसा करते हैं। न सोने का समय, न जागने का समय ,न खाने का समय सभी कुछ अनिश्चित।
हम कहीं भी कभी भी कुछ भी खा लेते हैं। ऊपर से मांस भक्षण ,सिगरेट, बीड़ी, शराब आदि शरीर को किसी प्रकार का लाभ नहीं देते , आलसी और प्रमादी बनाते जाते हैं। संपूर्ण मानव जाति किस व्यवस्था की ओर भाग रही है, यह कहना अतिशयोक्ति होगी। सभी अपने और अपनी सच्चाई की बात करते हैं किंतु शरीर को कष्ट देकर वृद्धा अवस्था के लिए पहले से ही व्यायाम आदि द्वारा कोई तैयारी नहीं करते ।आत्मा को भोजन नहीं देते कोई ध्यान नहीं लगाते।
हम अपने दैनिक जीवन में न ही स्वाध्याय करते हैं न ही पूर्व-नियोजन अर्थात पहले से आने वाले समय की तैयारी के लिये हमारे पास समय नहीं होता. दूसरे शब्दों में कहें तो अपना बुढ़ापा वर्षों पूर्व नियोजित न कर के हम अपने साथ-साथ परिवार वालों के लिए भी कठिनाइयां बढ़ाते चलते हैं जो कि बिलकुल समझदारी नहीं है.

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