ज़रा हट कर: नकलीपन की असली झलक- कैसे हो आप?

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ये आज की दुनिया का नकलीपन है जो मूल रूप से पाश्चात्य जगत से चल कर भारत आया है. हम लोग जब भी मिलते थे राम राम करके एक दूसरे का अभिनंदन करते थे. अधिक बोलने का मन होता था तो किधर जा रहे हो कहाँ से आ रहे हो क्या कर रहे हो कैसे बैठे हो आदि सामान्य प्रश्न करके मिलने की औपचारिकता का निर्वाह कर देते थे. किन्तु आप कैसे हो पूछ कर निकल नहीं लेते थे – क्योंकि वैसे भी ऐसा पूछ कर करना धरना तो कुछ होता नहीं है, अपना रस्ता पकड़ लो और पतली गली निकल लो.

दोनों तरफ से नकलीपन

आप कैसे हैं ? – मैं अच्छा हूँ ! इस आज के युग के नकली व्यवहार में नकलीपन असीम है. इधर से भी नकली और उधर से भी नकली. प्रश्न भी नकली तो उत्तर भी नकली. प्रश्न पूछने वाला भी नकली तो उत्तर देने वाला भी नकली. न ही प्रश्न पूछने वाले को कुछ पड़ी है आपकी या आपकी समस्या की. रोज सुबह से शाम तक मिलने पर, फोन पर या सोशल मीडिया पर वार्तालाप के दौरान पचास बार इस नकलीपन को दुहराया जाता है. मूल रूप से इस प्रश्न का उद्देश्य ही आपकी शुभकामना है किन्तु ये शुद्ध रूप से नकली है. नकली व्यवहार का बोझ लाद कर जीने से क्या फायदा!

शुद्ध भेड़चाल- ”क्या हालचाल?”

कहने को तो कहा जाता है कि ये तो हालचाल जानने का तरीका है, पर आप सोच के देखिये क्या यह वास्तव में हालचाल जानने का तरीका है? एक दूसरे के हाल-समाचार हम भारतीयों के द्वारा एक दूसरे से तब लिए या जाने जाते थे जब एक दीर्घ अवधि के उपरान्त आपस में मिलना हो. कमाल है आज तो रोज़ मिलने पर या रोज़ बात करने पर कैसे हो बोल कर बिना मतलब में नकलीपन दिखाने वालों की लाइन लगी है.

अब आपको ये उत्तर देना है

लोगों को समझाने से भेड़ चाल वाली दुनिया को बात आसानी से समझ नहीं आएगी. आपको उल्टी तरह से ही बात समझानी होगी. अब अगली बार जब कभी कोई आपसे फ़ोन पर या सामने से ये वाला रट्टा मार
प्रश्न करे – कैसे हो ? तो तुरंत कहिये अगर ठीक नहीं हूँ तो क्या मदद करोगे? सामने वाला आपको भी समझ जाएगा और आपके प्रश्न को भी. और नाइंटी परसेंट मामलों में ऐसे लोग झट से पतली गली पकड़ के निकल लेंगे. जो थोड़े बहुत लोग ये सुन कर भी आपसे बात करेंगे उनमे से भी नाइंटी परसेंट लोग सिर्फ आपकी समस्या / परेशानी पूछेंगे और बड़ी मुश्किल से एक परसेंट लोग आपको मिलेंगे जो आपकी समस्या में आपकी सहायता कर सकेंगे या सहायता करने में वास्तविक रूचि दिखाएँगे.

इस तरह होगी पहचान

आपके इस उपरोक्त प्रश्न के उपरान्त ही आपके सगे और सड़क चलते लोगों में आपको अंतर् समझ आ जाएगा. आप अचम्भित न होइएगा ये जान कर कि आपके जानने वालों में निन्यानबे प्रतिशत लोग नकली हैं – आपके सगे नहीं हैं. ये लोग सेज होने का अभिनय कर रहे हैं पर इनको आपसे कोई लेनादेना नहीं है और अगर लेना-देना है भी तो अपना ही लेना है आपको देना कुछ नहीं है. इस स्थिति में जो एक प्रतिशत लोग आपको मिलें उनको जीवन में कभी न त्यागें. ये हैं आपके अपने सगे और यही हैं आपके शुभचिंतक. इनसे कहिये कि आपको सदा ही अधिकार है मुझसे यह पूछने का कि – आप कैसे हैं?

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